मैं तोड़ दूंगा,
पहाड़ों को,
अगर वो,
कुचल न सके,
मेरी साँसों को.
मैं उलट दूंगा,
इस जमाने को,
अगर ये रोक न सका,
मेरे कदमों को.
मैं इसलिए नहीं आया,
धरती पे,
की छू सकूँ,
उचाईयों को.
मगर मैं जला दूंगा,
इस आसमान को,
अगर ये न बरसने दे,
बादल को, परमीत