तन से गिरा दिया है आँचल,
अब, मन से ना गिराइये।
त्याग मेरा और मेरे तन का,
मुझको स्वीकार है,
पर अपने मन से ना निकालिये।
बुझ दूंगी मैं अपने रूप लावण्या,
के इस जलते अंगार को,
पर आप किसी और के रूप,
को न निहारिये, परमीत।
तन से गिरा दिया है आँचल,
अब, मन से ना गिराइये।
त्याग मेरा और मेरे तन का,
मुझको स्वीकार है,
पर अपने मन से ना निकालिये।
बुझ दूंगी मैं अपने रूप लावण्या,
के इस जलते अंगार को,
पर आप किसी और के रूप,
को न निहारिये, परमीत।