अगर न होते माता-पिता,
तो कैसा होता बचपन,
भूख से बिलखता मैं,
और, कचरे में ढूंढता भोजन।
अगर न होते माता – पिता,
तो कैसा होता योवन,
जुवा खेलता गलियों में,
और, करता मदिरा-सेवन।
अगर न होते माता – पिता,
तो कैसा होता जीवन,
मैं गुलामी करता किसी का,
और, लोग करते मेरा शोषण।
मैं शेर सा दहाड़ता हूँ,
परमीत, जाकर हर एक वन,
अगर न होते माता-पिता, तो,
गिदर सा उठता, किसी का जूठन।