ना मैं देवो को मैं मानता,
ना मैं गुरुवों को जानता,
मैं रणभूमि तक आ गया हूँ,
बस पिता को ही मैं पूजता,
तो,
करों सामना मेरी तीरों का,
की मैं ही अर्जुन हूँ.
ना तन को देखो, ना कद को,
की नशों में दौड़ता,
मैं वो ही ख़ून हूँ.
माँ के गर्भ में ही,
पढ़ लिया था पाठ,
मैने अपने पिता से.
करों सामना मेरे बल का,
मैं ही श्वेतवाहन हूँ.
न उत्तरा का हूँ मैं,
ना मैं सुभद्रा का,
ना ही मैं हूँ कृष्णा का,
ना मैं बलराम का,
नाता मेरा बस एक ही है,
परमीत, की मैं ही अर्जुन हूँ,
हाँ, मैं ही अर्जुन हूँ.