मीठी नींद


पिता,
इसलिए नहीं की,
कोई गोद नहीं है,
मैं रोता हूँ.
पिता,
इसलिए भी नहीं,
की खाने पे कोई,
साथ नहीं है,
मैं रोता हूँ.
और,
इसलिए भी नहीं की,
कोई रहनुमा नहीं है,
मैं रोता हूँ.
बल्कि,
इसलिए रोता हूँ,
की अब वो नजर नहीं,
जो मुझमे एक अच्छाई,
ढूंढ सके.
वो जिगर नहीं,
जो हमारी नजर को,
पढ़ सके.
वो दर नहीं,
जहाँ मैं दो घडी,
चैन पाने के लिए,
आँखे बंद कर सकूँ, परमीत।

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