शहंशाह


इस गुलशन के,
हम गुलफाम है यारों,
जब हम न होंगे तो देखना,
अपना अंजाम मेरे यारों.
शहंशाह वो ही है,
जो गरीबो की दुआ ले,
अमीरों की सौगाते तो,
महफ़िलो में बँटती है.
हमने आज तक,
घूँघट नहीं उठाया,-2
दर्पण में ही उन का,
मुखड़ा देखते हैं.
ये मत पूछो की,
हम क्यों रौशनी से डरते हैं,
आजी अंधकारों में ही,
दियें पलते हैं.
हम कहीं भी रहें,
कितना भी खा लें परमीत,
भूख से बिलखते रहते हैं,
जब तक माँ के हाथ से,
निवाला न मिले.
इस गुलशन के,
हम गुलफाम है यारों,
जब हम न होंगे तो देखना,
अपना अंजाम मेरे यारों.

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