जीवन


निराश मन,
बेताब मन,
बेचैन मन,
वक्त के दोराहे,
पे खड़ा,
किस तरफ जाए,
दोनों तरफ हार है.
हार कर स्वीकार करूँ,
अपनी पराजय,
या सफलता के चुम्बन,
के सपने सजोंते-सजोंते,
मिटा दूँ, परमीत
ये जीवन।

हिंदुस्तान- पाकिस्तान


तलाश,
आज खत्म हुई,
ए दिल,
जब देखा,
उनका चेहरा।
मगर एहसास,
हुआ,
मज़बूरी का,
सिसकते जज्बातों का,
की कह भी,
नहीं सकते उनको,
हम अपना।
सुकून-दर्द का,
एक रिश्ता है,
जो साथ-साथ,
बहता रहता है,
एक हाथ के,
फासले पे भी,
हिंदुस्तान- पाकिस्तान में,
मीलों का,
फासला हैं, परमीत।

लाहौर के बादल


वो लाहौर की हैं,
या फिर कराची से,
दिल कहता है,
की कोई रिश्ता है,
उनका मेरे काशी से.
आँखों में वही,
काजल हैं,
जो उड़ता है,
धुंवा बनके,
अब भी मेरे,
गाछी में.
एक नजर से ही,
वो अपने,
सोंख गयीं,
दिल में उठती,
गंगा की हर,
धारा को.
बादल उठें है ये,
पेशावर से,
या बलूचिस्तान से,
पर बरस रहे हैं, परमीत,
ये तेरे,
दिले-हिंदुस्तान पे.

माँ


कोई समझता नहीं है,
ममता के आँचल को,
किस्मत बदलती है,
बस माँ दोस्तों।
वो दबाते रहे तलवे,
मौलवियों- शंकराचार्यों के,
मैंने चूमा चरण एक बार माँ के,
सितारे चमकने लगे हैं,
मेरी कदमो में आके.
कोई समझता नहीं है,
ममता के आँचल को,
हर विघ्न बेटे का,
हरती है बस माँ दोस्तों.
कोई समझता नहीं है,
ममता के आँचल को,
किस्मत बदलती है,
परमीत, बस माँ दोस्तों.

लक्ष्य


मैं इसलिए धरती पे नहीं आया हूँ,
की हुस्न तेरा श्रृंगार करता रहूँ,
तेरी आँखों में झांक के,
तेरी जुल्फों में सो के
अपनी जिंदगी काटता रहूँ।
मैं इसलिए धरती पे नहीं आया हूँ,
की हर दर पे सर झुकता रहूँ,
कभी लाचार बन के उनकी चौखट पे,
कभी बीमार बन के उनकी चाहत में,
उनका इंतज़ार करता रहूँ।
मैं इसलिए धरती पे नहीं आया हूँ,
की स्वर्णो की चाहत में संग्राम करूँ।
मैं इसलिए धरती पे भी नहीं आया हूँ,
की सफलता के झंडे लागउँ।
मैं आया हूँ, तो
इस धरती को हरा कर जाऊँगा,
हर तरफ शीशम के पेड़ लगा जाऊँगा।
गायों को बहुत दूर तक चरना न परे,
इस माटी के कण-कण में परमीत,
हरी- हरी घाँसे खिला जाऊँगा।

This is the poem related to the confusion the writer has in his life. He is not able to understand the purpose of his life in this world. Then he realized that he is not here to do science, film and marriage. He is not on this earth to collect gold, land and property, he is not here to  do fight, to rule or to guide people. He is here to serve his mom, his country and the Nature. He wants to plant as many trees as possible. He wants to cover all the lands with trees, grass and flowers so that a cow does not need to go very far for grazing. A child does not need to go very far to get the fruits.

त्रिया-चरित्र


घर दुआर छोड़ के,
हो गईलन सन्यासी,
फ़लेनवा के नाती हो,
फ़लेनवा के नाती।
सुनलेरनी उनकर,
भीरल रहल टंका,
तहरे से रानी हो,
तहरे से रानी।
बड़ों-बड़ों के बीच में,
करस तहार बखान हों,
देखअ उनकर बिकअता,
खेत आ खलिआन हों।
दबी जुबान में हर कोई कहे,
की उनकर,
भीरल रहल टंका,
तहरे से रानी हो,
तहरे से रानी।
छीन के आपने,
मेहरारून के पैजनियाँ,
बाँध देहलन तहके,
बनइलन दुल्हनियां।
की ओइसन,
राज कुमार से,
एगो सुकुमार से,
तुहुँ मंगवैलू,
भीख के दाना हो।
सुनलेरनी उनकर,
भीरल रहल टंका,
तहरे से रानी हो,
तहरे से रानी।
कतना लिखान भइल,
कतना पुराण भइल,
कोई न समझल,
ई त्रिया-चरित्र हो।
की कहतारन बाबू,
ईह परमीत सिंह,
की हम न करेम,
तहसे रानी ई प्रीत हो।
सुनलेरनी ताहर,
भीरल रहल टंका,
उनकरे से रानी हो,
उनकरे से रानी।

मेरे सैंया बड़े रंगीले


मेरे सैंया बड़े रंगीले,
मेरे सैंया बड़े रंगीले,
मैं पकाऊँ भिण्डी,
वो मांगते हैं करेलें।
मेरे सैंया बड़े रंगीले।
मेरे सैंया बड़े रंगीले,
मै खाती हूँ थोड़ा सा,
वो खाते हैं भर के पतीले।
मेरे सैंया बड़े रंगीले।
मेरे सैंया बड़े रंगीले,
दिवाली मे खेलें होली,
और होली मे जलाएं दिये।
मेरे सैंया बड़े रंगीले।
मेरे सैंया बड़े रंगीले,
मै कहती हूँ चलो घूम आएं,
वो कहते है आवों लुड्डों खेलें।
मेरे सैंया बड़े रंगीले।
परमीत, मेरे सैंया बड़े रंगीले।