इस सल्तनत के,
हम सरदार।
एक दिन होगी,
यहां अपनी सरकार।
लोग कहेंगें हमें,
राजकुमार।
और दिन भर बजायेंगे,
हम सितार।
लगातार-लगातार।
अपनी खेतों में होंगे,
ताड़ के पेड़।
लोगों से रखूँगा,
जी हर के बैर।
भर-भर के थालियां,
खाऊंगा,
भर पेट मछलियाँ।
होम मिनिस्टर से प्राइम मिनिस्टर,
सारे लगाएंगे मेरे बिस्तर।
अपनी सेना में होंगे,
बस छुछुंदर।
अति सुन्दर, अति सुंदर।
सेक्सी साइरन से थैन्डर थाई,
सब बनेंगी बस अपनी लुगाई।
फिर तो परमीत की,
होंगी रोजाना आँखे चार।
बारम्बार-बारम्बार।