प्रिये


न रूठों प्रिये,
यूँ मुख मोड़ के.
की हम जियेंगे कैसे,
बिना इन ओठों के.
चाहो तो हर लो,
अब प्राण मेरे.
पर दूर न जाओ,
मेरी इन बाहों से.
की हम जियेंगे कैसे,
बिना इन ओठों के.
न रूठों प्रिये,
यूँ मुख मोड़ के.
की हम जियेंगे कैसे, परमीत
बिना इन ओठों के.

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