लक्ष्य और कर्ण


ए दिल,
ए दिल,
उड़-उड़,
के देख ले,
सपना है तेरा।
टूट जाए,
मिट जाए,
क्या जाता है तेरा।
यूँ ही, तू तो,
ठुकराया हुआ है,
यूँ ही, तू तो,
कितनी रातो से,
सोया नहीं।
तो उठ-उठ,
के मार,
लक्ष्य है तेरा।
जीते,
न जीते तू,
कट जाए,
मिट जाए,
क्या जाता है,
परमीत तेरा।

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