इस कदर तू पिला मेरे साकी,
की जीने की तमन्ना फिर से बने.
जाते- जाते भी तेरे दर से,
खुसबू तेरी ही दामन में रहे.
काले चादर में लिपटी,
मेरी दुल्हन आ रही है.
की उसके आगोस में जा कर भी,
धुरंधर के सीने में तेरी यादे रहे.
इस कदर तू पिला मेरे साकी,
की जीने की तमन्ना फिर से बने.
जाते- जाते भी तेरे दर से,
खुसबू तेरी ही दामन में रहे.
काले चादर में लिपटी,
मेरी दुल्हन आ रही है.
की उसके आगोस में जा कर भी,
धुरंधर के सीने में तेरी यादे रहे.