चंचल मन, कोमल तन,
बालकपन में अभिमन्युं।
अभिमन्युं-अभिमन्युं।
माँ का दूध पीते – पीते,
पहुंचा रण में अभिमन्युं।
अभिमन्युं-अभिमन्युं।
चारों तरफ सेनाएं सुसज्जित,
बीच में अकेला अभिमन्यु।
अभिमन्युं-अभिमन्युं।
द्रोण-कर्ण के तीरों को,
तिनकों सा उड़ता अभिमन्युं,
अभिमन्युं-अभिमन्युं।
कर्ण के पूछने पे परिचय, बोला
माँ मेरी सुभद्रा, मैं उसका अभिमान-अभिमन्यु।
अभिमन्युं-अभिमन्युं।
एक अर्जुन से बिचलित कौरव,
के समुख काल सा धुरंधर अभिमन्युं।
अभिमन्युं-अभिमन्युं।