अगर कजरा उनसे जो कर दे शिकायत,
तो कजरे को काली कहेंगी।
जो मैं कर दूँ उनके हुश्न की तारीफ़,
तो आगे बढ़ के मुझको गाली पढ़ेंगी।
अगर गजरा उनसे जो कर ले मोहब्बत,
तो इसे गजरे की नादानी कहेंगी।
जो मैं थाम लूँ लहर अपने दिल की,
तो इसे धुरंधर की ठंडी जवानी कहेंगी।
वो सजती हैं खुद को ही देख आईने में,
अपने योवन पे इठलाती हुई.
अगर आईना कह दे जो सच्चाई,
तो फिर उसे बस सीसा कहेंगी।
जो मैं सूना दूँ हाले दिल उन्हें अपना,
तो फिर मुझे एक झूठा ही कहेंगी।
मिलती है वो सबसे हंस के हंसा के,
बस रखती है हमसे ही दूरियां।
जो मैं पूछूं राज उनके इस भेद का,
तो अपनी अदा को वो हया ही कहेंगी।
जो थाम लूँ मैं बढ़ के कलाई,
तो परमीत को बेहया ही कहेंगी।
चलती हैं ढलका के आँचल को सीने से,
और परचित की इसे शैतानी कहेंगी।
जो मैं मिटा दूँ उनपे अपनी जिंदगी,
तो जवानी की मेरी ये नादानी ही कहेंगी।
Month: June 2014
परशुराम -लक्ष्मण
मैं राम नहीं,
की श्र्वन करूँ।
परिणाम का चिंतन,
मनन करूँ।
मैं तीरों का अभिलाषी हूँ,
फिर परशु से क्या डरु.
मैं अहंकारी नहीं,
की शान करूँ।
जीवन का अपने,
गुणगान करूँ।
मैं रघुबंसी रामपथगामी,
बस राम का गुणगान करूँ।
नाम में मेरे क्या रखा है.
वीर पल नहीं गवाते विवाद में.
लक्ष्मण के रहते,
धुरंधर राम आएं,
रण में,
ऐसी हमारी मर्यादा नहीं।
घास की रोटी
पकाया है तुमने तो,
घास की ये रोटी नही.
अपने हाथो से खिला दो,
फिर ऐसा जीवन नहीं.
कष्ट क्या है धुरंधर राणा को,
जब तक तुम्हारे नयनो में हूँ.
बाहों में सुलो लो अपने,
फिर ऐसी कोई महल नहीं.
राणा
राणा ने संग्राम किया,
न कभी आराम किया।
एक चेतक के साथ पे,
मेवाड़ को आजाद किया.
हल्दीघाटी की वो ऐसी लड़ाई,
हाथी पे बैठे,
अकबर तक भाला थी पहुंचाई।
राणा ने संग्राम किया,
न कभी आराम किया।
राजपुताना के शान पे,
धुरंधर जीवन को,
कुर्बान किया।
पिला मेरे साकी
इस कदर तू पिला मेरे साकी,
की जीने की तमन्ना फिर से बने.
जाते- जाते भी तेरे दर से,
खुसबू तेरी ही दामन में रहे.
काले चादर में लिपटी,
मेरी दुल्हन आ रही है.
की उसके आगोस में जा कर भी,
धुरंधर के सीने में तेरी यादे रहे.
अभी तो मैं जवान हूँ
तुमने तो सारी उम्र गुजार दी,
और अब शादी की बात करते हो.
अभी तो मैं जवान हूँ,
और तुम मुझसे ऐसी बात करते हो.
अभी तो मैं खेलूंगी, खिलाऊँगी,
अपनी अदाओं पे सबको नचाउंगी,
अभी तो मैं प्रियंका-कटरीना हूँ,
और तुम मुझसे,
बिपाशा-करीना की बात करते हो.
बेशर्म हो तुम, बेहया हो तुम,
मैं तुम्हे अब क्या कहूँ?
बेगैरत हो तुम.
अभी तो मैं छलकती,
आलिया हूँ.
और तुम मुझमे,
प्रीटी और रानी ढूंढते हो.
तुमने तो सारी उम्र गुजार दी,
और अब तुम धुरंधर,
मुझसे शादी की बात करते हो.
परमीत सिंह धुरंधर
पुरुषों की गति
अभिलाषाओं ने,
ऐसी कर दी,
पुरुषों की गति.
की कहीं रावण,
हरता है सीता को.
कही पतियों ने दावँ,
पे लगा दी पत्नी।
समर में प्राणों पे,
खेलने वाले,
आँचल को हरने लगे.
और ब्राह्मण भी,
डूब गए वासना में,
भूल कर वेदों की,
धुरंधर संस्कृति।
सुभद्रा-अभिमन्यु
चंचल मन, कोमल तन,
बालकपन में अभिमन्युं।
अभिमन्युं-अभिमन्युं।
माँ का दूध पीते – पीते,
पहुंचा रण में अभिमन्युं।
अभिमन्युं-अभिमन्युं।
चारों तरफ सेनाएं सुसज्जित,
बीच में अकेला अभिमन्यु।
अभिमन्युं-अभिमन्युं।
द्रोण-कर्ण के तीरों को,
तिनकों सा उड़ता अभिमन्युं,
अभिमन्युं-अभिमन्युं।
कर्ण के पूछने पे परिचय, बोला
माँ मेरी सुभद्रा, मैं उसका अभिमान-अभिमन्यु।
अभिमन्युं-अभिमन्युं।
एक अर्जुन से बिचलित कौरव,
के समुख काल सा धुरंधर अभिमन्युं।
अभिमन्युं-अभिमन्युं।
अभिमन्यु
मैं अपनी तीरों से,
नभ में तेरा नाम लिखूंगा।
हर एक पल में मेरी माँ,
तुझे प्रणाम लिखूंगा।
द्रोण-कर्ण भी देख लें,
माँ शौर्य तेरे दूध का.
जब मैं धुरंधर उनकी तीरों से,
चिड़िया बनाके उड़ाऊंगा।
ना यूँ कम्पित हो माँ,
भविष्य की कल्पना से.
मैं लाल तेरा हूँ माँ,
तेरा ही कहलाऊंगा।
द्रोण के चक्रविहू को तोड़,
वहाँ पुष्प खिलाऊंगा।
और उन पुष्पों से माँ,
रोज तेरा आँगन सजाऊंगा।
कंगन मैंने खरीदे हैं
इम्तहान मेरे जीवन की,
कब होगी मेरे ईस्वर,
मैने उनको चुन लिया है,
वो कब चुंनेंगी ईस्वर।
हाथों में चूड़ी है,
आँखों में काजल,
कानो में कुण्डल है,
पावों में पायल,
की कंगन मैंने खरीदे हैं,
वो कब पहनेंगी मेरे ईस्वर।
इम्तहान मेरे जीवन की,
कब होगी मेरे ईस्वर,
मैने उनको चुन लिया है,
वो कब चुंनेंगी ईस्वर।
बादल बरसते कितने मिलें,
उपवन में कितने ही फूल खिलें,
जो मन को मेरे छू ले,
वो कहाँ है शूल,
ह्रदय-आघात तो बहुत मिलें,
वो कब हृदय को सिचेंगी मेरे ईस्वर।
इम्तहान मेरे जीवन की,
कब होगी मेरे ईस्वर,
मैने उनको चुन लिया है,
वो कब चुंनेंगी ईस्वर।
राते जब आ-आके,
करती हैं मुझसे बाते,
तो सीने में उठती हैं,
लाखो जज्बातें,
की बासुरी तो बजा दी है प्रेम की,
धुरंधर ने,
वो मीरा बनके कब नाचेंगी मेरे ईस्वर।
इम्तहान मेरे जीवन की,
कब होगी मेरे ईस्वर,
मैने उनको चुन लिया है,
वो कब चुंनेंगी ईस्वर।