कृष्ण


मधुवन में मैं भी नाची,
मधुवन में तू भी नाची,
सखी, समझ नहीं पायी मैं,
कृष्ण थे किसके साथ में.
मटकी तेरी टूटी पनघट पे,
चुनर मेरी खोयी यमुना-तट पे.
सखी धुरंधर सिंह,
समझ नहीं पायी मैं,
कृष्ण थे किसके साथ में.

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