दिल चाँद बनके आज भी घटता – बढ़ता रहता है,
ये जवानी है मेरे यार, दिल मचलता रहता है.
इतने कांटो से जख्मो को पाकर भी,
ये बागों में जाकर फूलों को चूमता रहता है.
ये जवानी है मेरे यार, दिल मचलता रहता है.
परमीत सिंह परवाज
दिल चाँद बनके आज भी घटता – बढ़ता रहता है,
ये जवानी है मेरे यार, दिल मचलता रहता है.
इतने कांटो से जख्मो को पाकर भी,
ये बागों में जाकर फूलों को चूमता रहता है.
ये जवानी है मेरे यार, दिल मचलता रहता है.
परमीत सिंह परवाज