ज्ञान दीजिये, अरमान दीजिये,
या फिर मुझको ये वरदान दीजिये,
वृक्षों से हरी कर दूँ सारी धरती,
या प्रभु मुझको दर्शन दीजिये – दर्शन दीजिये।
मान दीजिये, सम्मान दीजिये,
या फिर मुझको ये वरदान दीजिये,
हर रोते हुए को मैं दे दूँ हंसी,
या प्रभु विष्णु मुझ पे भी धयान दीजिये।
परमीत सिंह परवाज
Jai shri vishnu
LikeLike