हिमालय की गोद में बैठा,
मैं पल-पल,
तुम्हे याद करता हूँ,
तुम्हे पाने की इतनी तमन्ना,
की सर्द हवाओं को,
अब अपना कहता हूँ.
तेरी जुल्फों की जंजीरे,
इतनी प्यारी हैं,
की मैं दुश्मन की गोलियों को,
सीने पे धारण करता हूँ।
परमीत सिंह ‘धुरंधर’
हिमालय की गोद में बैठा,
मैं पल-पल,
तुम्हे याद करता हूँ,
तुम्हे पाने की इतनी तमन्ना,
की सर्द हवाओं को,
अब अपना कहता हूँ.
तेरी जुल्फों की जंजीरे,
इतनी प्यारी हैं,
की मैं दुश्मन की गोलियों को,
सीने पे धारण करता हूँ।
परमीत सिंह ‘धुरंधर’