शिव


जहाँ शिव हैं, वहाँ शक्ति.
तुम निश्छल हो बाबा,
हम बंधे हैं लोभ से.
जहाँ शिव हैं, वहाँ भक्ति.
तुम महाकाल हो बाबा,
हम भयभीत है काल से.
जहाँ शिव है, वहाँ मुक्ति.

परमीत सिंह धुरंधर

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