जामे-मोहब्बत


हुस्न ने आज हमें आँखों से नहीं, ओठों से नहीं, शब्दों से पिलाया है,
जब उसने धुरंधर सिंह को “मनीष मल्होत्रा” कह कर बुलाया है.
मिलता नहीं है कोई इस बाजरे-किस्मत में मंजिल तक साथ देने को,
मगर राहे-सफर में किसी ने आज हमें क्या जामे-मोहब्बत पिलाया है.

मोहब्बत


दिल तोड़ के मेरा तुम मुस्कराने लगे,
मोहब्बत क्या है ये बताने लगे.
आँखों से जो दुनिया दिखाई थी मुझे,
ओठों तक आते-आते जुठ्लाने लगे.