ये बैल नहीं


ये बैल नहीं,
ये बैल नहीं,
ये बैल नहीं,
मेरे जवानी का,
दम्भ हैं.
मेरी आँखों की,
ज्योति,
ह्रदय की धड़कन,
और मेरे मुख का,
तेज हैं.
इनके घुंघरू से,
उठती है सीने में,
मेरे ज्वाला।
मेरे रातो का,
ख़्वाब,
दिल का,
अरमान,
और मेरी जवानी का,
अहंकार हैं.
झूमते हैं,
बहते हैं,
सींगो को लड़ा के.
मलते हैं,
दलते हैं,
उछाल -उछाल के.
मेरे खेतों का,
बहार,
मेरे आँगन का,
श्रृंगार,
और मेरे जीवन का
त्यौहार हैं.

परमीत सिंह धुरंधर 

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