भारत


विश्व भारती,
ये है धरती,
राम-रहीम जहाँ,
एक साथ खेले.
लहराने को तिरंगा,
वीर यहाँ,
हँसते-हँसते,
झूल गए.
देखो इस हिमालय को,
हमने जिसका मान रखा,
अपने लहू से रंग दिया,
जब-जब इसका शान घटा.
विश्व भारती,
ये है धरती,
जहाँ बड़े- बड़े संग्राम हुए.
और यहीं पे,
बुध-महावीर ने,
शान्ति के पाठ पढ़ें.

परमीत सिंह धुरंधर 

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