जिंदगी


दौलत की जितनी है,
मुझे चाहत,
उतनी दौलत कहाँ,
मिलती है.
माँगा है जिसे,
मोहब्बत में,
वो अब कहाँ,
दिखती है.
अरे प्यारों,
ये ही तो है जिंदगी,
ये कब हमारी मुठ्ठी में,
बंद रहती है.

 

परमीत सिंह धुरंधर 

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