तुझको प्यार ही नहीं,
मैं संसार कहता हूँ,
तू मेरी चाहत है,
ये खुले आम कहता हूँ.
ये जान कर भी,
की तू मेरी नहीं है,
तेरे तिब्बत पे मैं,
अपना अधिकार कहता हूँ.
माना की कभी तू बाहों,
में नहीं आएगी मेरे,
पर मैं आज भी तेरे,
क्रीमिया पे निगाहें रखता हूँ.
परमीत सिंह धुरंधर