उन्हें बेवफा मत कहो,
शुक्र है की वो किसी की तो हो गयी.
सीरत से न सही, सूरत से तो हो गयी.
बाढ़ में डूब जाते हैं कितने ही किनारें,
क्या हुआ?
जो कुछ वो भी डूबा गयीं.
दिल से न सही, जिस्म से तो हो गयीं.
उन्हें बेवफा मत कहो,
शुक्र है की वो किसी की तो हो गयी.
कैसे काटे कोई जीवन, किसी एक के साथ,
इसलिए,
किसी को निगाहें, किसी को अपने होठ दे गयी.
उन्हें बेवफा मत कहो,
शुक्र है की वो किसी की तो हो गयी.
परमीत सिंह धुरंधर