सुबह में देखि सीरत,
शाम को देखि सूरत.
बदले- बदले से,
दोनों लगे.
तब जाके समझी
कीमत.
सुख-दुःख में साथ देने का,
मीठा बोल बोलके.
जब जेब हुई खली,
सेज ही वो बेच गए.
अमीरी में देखि सोहरत,
गरीबी में देखि जिल्लत,
बदले – बदले से,
दोनों लगे.
तब समझी,
उनकी मोहब्बत.
परमीत सिंह धुरंधर