पलकों से उनके, मैं मोहब्बत कर बैठा,
ये ही तो खता हुई, उनकी चाहत कर बैठा।
अब होठों से सुरु होती है हर कहानी,
मैं लल्लू, आँखों में उनके डूब बैठा।
परमीत सिंह धुरंधर
पलकों से उनके, मैं मोहब्बत कर बैठा,
ये ही तो खता हुई, उनकी चाहत कर बैठा।
अब होठों से सुरु होती है हर कहानी,
मैं लल्लू, आँखों में उनके डूब बैठा।
परमीत सिंह धुरंधर