तेरी पलकों से इतना बिसरे हैं,
अब घुल रहे मेरे भी मिसरे हैं.
अर्ज करें से पहले कुछ भी,
तेरी इज़ाज़त चाहिए.
अब मेरी जिंदगी के बचे,
कुछ ही लम्हें हैं.
परमीत सिंह धुरंधर
तेरी पलकों से इतना बिसरे हैं,
अब घुल रहे मेरे भी मिसरे हैं.
अर्ज करें से पहले कुछ भी,
तेरी इज़ाज़त चाहिए.
अब मेरी जिंदगी के बचे,
कुछ ही लम्हें हैं.
परमीत सिंह धुरंधर