काला तिल


इतना खूबसूरत जिस्म,
पे ये काला तिल.
खुद ने लगा के तुम्हे उतरा है,
सबका दिल चुराने के लिए.
हम कहाँ तक खुद को बचाएं,
ये सितम तो है सबके उठाने के लिए.
तू मोहब्बत दे, या ठुकरा दे,
ये है तेरी मर्जी.
हम तो आते रहेंगे तेरे दर पे,
ये फ़रियाद सुननाने के लिए.

 

परमीत सिंह धुरंधर

 

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