जीवन चक्र


सूरज ने जब तपाया धरती को,
बादलों ने दी शीतलता।
एक बीज कही अंकुरित हुआ गोद में,
वृक्षों ने फिर लीं धरती पे साँसे।
थका-हारा एक राही,
जब छाँव में सुस्ताने बैठा।
तो वृक्षों ने दी उसके साँसों में,
जीवन की एक नई आशा.
जीवन का ये ही चक्र है,
छोटा-बड़ा, कोमल -पत्थर।
एक जीवन दूसरे जीवन से,
एक हाथ, दूसरे हाथ से बंधा है.

 

परमीत सिंह धुरंधर

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