रतिया तहरे से हाथ लड़ा के,
चूड़ी-कंगन, हँसुली हेरइली।
अइसन जीत के का करीं,
जब अकेले हम हीं आपन थाती लुटाइली।
परमीत सिंह धुरंधर
रतिया तहरे से हाथ लड़ा के,
चूड़ी-कंगन, हँसुली हेरइली।
अइसन जीत के का करीं,
जब अकेले हम हीं आपन थाती लुटाइली।
परमीत सिंह धुरंधर