सैयां तहरे जवानी के किस्सा रहल,
जो कचहरी में चलल रहल.
पंच-प्रमुख भी का करियन तहरा के,
उनकरो घरे त ताहर काँटा फसल रहल.
बड़ा कइलअ तू मनमानी राजा जी,
गाउँवा में सबके बनइलअ तू नानी राजा जी.
छोड़अ अब ई सब धंधा हमरो पर धयान द राजा जी,
अब संभालअ तू आपन घर और दुआर राजा जी.
परमीत सिंह धुरंधर