नीचे गिरना किस्मत का ठगना नहीं है,
कभी कभी नीचे गिरने वालों को ही जन्नत मिलते हैं.
आँखों से दो आंसू ढलके, गालो पे सुलगते हैं,
जो विरले होते हैं, वो गिरकर होंठों को चूमते हैं,
जो होते हैं और भी किस्मत के धनी,
वो और नीचे गिरकर, वक्षों में बसते हैं.
परमीत सिंह धुरंधर