मेवाड़ की गोरी


तेरी ऐसी नजरिया है काली, हम भी दीवाने हो गए.
तूने ऐसी नजरिया है डाली, राणा भी मस्ती में बहक गए.
सोने सा योवन तू लेके, चलती है जो पनघट पे,
भींगे-भींगे तेरे तन से, सुलगता है सबका तन-मन रे.
तूने ऐसी पहनी रे चोली, हम भी दीवाने हो गए.
तूने ऐसी सिलाई रे चोली, राणा भी मस्ती में आ गए.
झुकी-झुकी नजरो से जो तू देखे एक बार,
मेवाड़ में बहने लगती है, मस्त-वयार।
तूने ऐसी है पेंच लड़ाई, हम भी दीवाने हो गए.
तूने ऐसी है ढील बढ़ाई, राणा भी मस्ती में बहक गए.
खिला-खिला तेरा अंग, छेड़े मन में मेरे मृदंग,
जो भी देखे तुझे, चाहे तेरा ही संग.
तूने ऐसी है आँचल उड़ाई, हम भी दीवाने हो गए.
तूने ऐसी है ली अंगराई, राणा भी मस्ती में आ गए.

परमीत सिंह धुरंधर

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