पिता-परमेश्वर


मेरी उदण्डता, मेरी प्रचंडता,
मेरी शक्ति के, दाता तुम.
तुम पिता नहीं, परमेश्वर हो,
इस जीवन के, अधिष्ठाता तुम.
प्राणों से प्रिये हो मुझको,
प्यारी से भी प्यारे हो.
त्रिलोक को जीत के मैं लौटूं,
रखते हो ऐसी अभिलाषा तुम.
तुम पिता नहीं, परमेश्वर हो,
मेरे भाग्य के विधाता तुम.

परमीत सिंह धुरंधर

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