खूबसूरत से एक मोड़ पे,
तन्हा सा मैं बैठा था.
तू गली में जब निकल कर आई,
किस्तों में दिल टुटा था.
नजरे झुका कर, तू चल रही थी,
अपने आँचल में सब कुछ छुपाएँ,
तेरी लहराती जुल्फों की,
हर लट से मेरा दिल उलझा था.
परमीत सिंह धुरंधर
खूबसूरत से एक मोड़ पे,
तन्हा सा मैं बैठा था.
तू गली में जब निकल कर आई,
किस्तों में दिल टुटा था.
नजरे झुका कर, तू चल रही थी,
अपने आँचल में सब कुछ छुपाएँ,
तेरी लहराती जुल्फों की,
हर लट से मेरा दिल उलझा था.
परमीत सिंह धुरंधर