आधे लोग तो,
हमें देख के खुद ही गिर जाते हैं,
और आधों को हम गिरा देते हैं.
लोग यूँ हैं नहीं कह उठते हैं,
की “लो आ गया”,
ज्यूँ ही हम दिख जाते हैं.
परमीत सिंह धुरंधर
आधे लोग तो,
हमें देख के खुद ही गिर जाते हैं,
और आधों को हम गिरा देते हैं.
लोग यूँ हैं नहीं कह उठते हैं,
की “लो आ गया”,
ज्यूँ ही हम दिख जाते हैं.
परमीत सिंह धुरंधर