बैल, सैया हमार,
बकलोल रे.
सखी हमार भाग,
फुटल मिलल रे.
लाख मन के योवन,
चोलिये में रह गइल.
सैया बथान में,
पुआल देखे रे.
देवरानी दही पे,
रोज छाली चखे.
नन्दी घूम-घूम के,
गावं में दावँ मारे रे.
जलअता योवन हमार,
चूल्हे की आंच पे.
सैया दुआर पे,
तास खेले रे.
सखी हमार भाग,
फुटल मिलल रे.
परमीत सिंह धुरंधर