लड़की काश्मीर की


तुम लड़की काश्मीर की,
मैं लड़का बिहार का.
आ जा खेल ले थोड़ा-थोड़ा,
ये खेल प्रेम का.
तुम लड़की काश्मीर की,
मैं लड़का बिहार का.
आ जा घर बसा लें,
हम दिल्ली में यहाँ।
तुम धीरे-धीरे चलना,
हर सुबह मुस्करा के.
मैं तुमको चाय पिलाऊं,
तुम मुझको खाना खिलाना.
तुम लड़की काश्मीर की,
मैं लड़का बिहार का.
आ जा खेल ले थोड़ा-थोड़ा,
ये खेल प्रेम का.
तुम सर्दी कहो तो,
मैं सर्दी कह दूंगा।
भरी दुपहरिया में,
कम्बल ओढ़ के हाँ.
तुम लड़की काश्मीर की,
मैं लड़का बिहार का.
आ जा घर बसा लें,
हम दिल्ली में यहाँ.
रोज तुम्हारी नखरों पे,
सुबहा-शाम हो.
रोज हमारी फरमाइशों,
से सजी रात हो.
तुम लड़की काश्मीर की,
मैं लड़का बिहार का.
आ जा खेल ले थोड़ा-थोड़ा,
ये खेल प्रेम का.
हर रोज एक नई,
नथुनी मैं तुमको दूंगा.
तुम सज-संवर के,
मुझसे मिलती रहना।
तुम लड़की काश्मीर की,
मैं लड़का बिहार का.
आ जा घर बसा लें,
हम दिल्ली में यहाँ.

परमीत सिंह धुरंधर

जश्न


बढे चलो यूँ ही मेरे दोस्त,
जीवन पथ पे.
हर पल में पाओगे हमें,
कदम – से – कदम मिलाते.
हर उतार-चढ़ाव में,
मेरा कन्धा और हाथ हैं तुम्हारे लिए.
और हर जश्न में मैं मिलूंगा,
तुम्हारे साथ जाम उठाये.

परमीत सिंह धुरंधर

उन्नत वक्ष


तुम्हारे उन्नत-उन्नत वक्षों पे,
फीका है चाँद अम्बर का.
तुम्हे मय की क्या जरुरत,
नशा है तुमसे मयखाने का.
तुम चलो तो दरिया सुख जाए,
प्यास बढ़ जाए सागर का.
तुम्हारे गहरे-गहरे नैनों पे,
दम्भ है झूठा सागर का.
तुम्हे मय की क्या जरुरत,
नशा है तुमसे मयखाने का.
तुम्हारे नितम्बों पे झूलती ये चोटी,
जैसे चन्दन बन का मतवाला भुजंग।
तुम्हारे मधुर – मधुर इन अधरों के आगे,
देवों का अमृत विषैला है.
तुम्हे मय की क्या जरुरत,
नशा है तुमसे मयखाने का.

परमीत सिंह धुरंधर

मोहब्बत


मोहब्बत में पगला के हम भी,
बुरका पहनने लगे हैं.
वो तो दिखती नहीं हैं,
और हम भी खुद ही सवारने लगे हैं.
शर्मो-हया की अपनी दे के दुहाई,
वो बैठी है घर की दीवारों में,
और हम भी उनके छत पे,
अपनी पतंगें भिड़ाने लगे हैं.

परमीत सिंह धुरंधर

Crassa


आधे लोग तो,
हमें देख के खुद ही गिर जाते हैं,
और आधों को हम गिरा देते हैं.
लोग यूँ हैं नहीं कह उठते हैं,
की “लो आ गया”,
ज्यूँ ही हम दिख जाते हैं.

परमीत सिंह धुरंधर

सेनाएं


यूँ हैं सरहदों पे नहीं लड़ती हैं सेनाएं,
कुछ लोगो को मौत का भय नहीं होता।

परमीत सिंह धुरंधर

जूनून


कुछ तो किस्मतों का साया है,
मोहब्बत में जिंदगी बस, जाया है.
सरहदों पे मिटने वालों की,
कब हुईं हैं ये जागीरें,
इश्क़ में रह जाती हैं,
बिना छत के ही घर की दीवारें.
फिर भी ये जूनून है,
हमारे जिस्म का,
साँसों के रुकने तक,
लगी रहती हैं हमारी उम्मीदें.

परमीत सिंह धुरंधर

गुनाहों के साये


कई रिश्ते मेरे,
आज भी गुनाहों के साये में हैं.
और कई रिश्तों के लिए मैं,
आज भी गुनाहें कर जाऊँगा.
वो मेरी न बन सकी,
ये किस्मत नहीं,
उनकी मर्जी है,
वो अगर आज मुस्करा दें,
तो उनको अपना बनाने के लिए
आज भी क़यामत मचा जाऊंगा.

परमीत सिंह धुरंधर

लाखों में है एक मेरी माँ


mom

पहाड़ों पे चढ़ के देखा,
सितारों में बढ़ के देखा,
दिखती है बस माँ, हर मंदिर में,
जब भी सजदा कर के देखा।
भूखे पेट चल के देखा,
बैलों संग खेत में बह के देखा,
चूल्हे पे बैठी दिखी माँ,
जब – जब सुनी थाली देखा।
जख्मों को दुखते देखा,
हर रिश्ते को टूटते देखा,
रात भर सिराहने बैठी मिली माँ,
जब भी तन, टॉप में तपते देखा।
कैसे तोड़ दूँ ये रिस्ता,
जवानी की मस्ती में,
जिसके आँचल में पल कर,
मैंने हर सपना देखा।
सारी दुनिया घूम के देखा,
लाखों में है एक मेरी माँ.

परमीत सिंह धुरंधर

There is nothing which has more value than mom…..

मैराडोना मैं, मेडोना तू


रूप-रंग में सोना तू,
अंग-अंग से टोना तू,
आज तो घूँघट खोल दे रानी,
मैराडोना मैं, मेडोना तू.
मैराडोना मैं, मेडोना तू.
मैराडोना मैं, मेडोना तू.
आज की रात लम्बी है,
तन-मन पे छाई मस्ती है.
बस अपने ओठों से पिला दे तू,
क्रिस्टिनो मैं, बिपाशा तू.
क्रिस्टिनो मैं, बिपाशा तू.
क्रिस्टिनो मैं, बिपाशा तू.

परमीत सिंह धुरंधर

This is dedicated to my favorite player Meradona and his love for the game.