उनकी जवानी का नशा है,
रातों की मस्ती,
और अंगों के चुभन से.
मेरी जवानी का मज़ा है,
जंगे – जमीन पे,
लहू बहाने में.
परमीत सिंह धुरंधर
उनकी जवानी का नशा है,
रातों की मस्ती,
और अंगों के चुभन से.
मेरी जवानी का मज़ा है,
जंगे – जमीन पे,
लहू बहाने में.
परमीत सिंह धुरंधर