जीवन हो तो शिव सा


जीवन हो तो शिव सा,
सर्वश दान कर दूँ.
मैं चखुं बस विष को,
जग को अमृत-पान दूँ.
अवघड कहे जग मुझे,
या भभूत-धारी।
या फिर योगी बन के,
मैं भटकता रहूँ।
पर भगीरथ के एक पुकार पे,
मैं प्रलय को बाँध दूँ.
जीवन हो तो शिव सा,
सर्वश दान कर दूँ.

परमीत सिंह धुरंधर

एक चाँद आता है


अक्सर रातों में, मेरे ख़्वाबों में,
एक चाँद आता है, बादलों में.
वो करता है इसारे, जुल्फों को सवारें,
मैं देखता हूँ खुली पलकों से.
बदली के आर से, नैनों के तार से,
धड़कनो को मेरे, वो छू के जाता है.
एक चाँद आता है,
एक चाँद आता है.
रोसनी दुनिया की उसके आँखों से ,
चांदनी रातों की उसके आँचल से.
मैं तरपता हूँ, मैं तरसता हूँ,
जब उसका आँचल ढलक जाता है.
एक चाँद आता है,
एक चाँद आता है.
सोया नहीं मैं कितनी रातों से,
जागता हूँ यूँ ही उसकी राहों में.
सिमट आती हैं सारी हवाएँ,
चुने को उसके बदन को.
सज – सवर के जब वो निकलता है.
एक चाँद आता है,
एक चाँद आता है.

परमीत सिंह धुरंधर

मीठे दीये


तेरे नैना मिलते है जो मेरे नैनों से,
तो पूरी रात जलते हैं ये दीये।
कैसे मैं कह दूँ,
मीठे लगते है मुझे ये दीये।

परमीत सिंह धुरंधर

शिकायत


यूँ ही शाम को,
मिला करो.
ढलती धुप में,
हमसे जरा.
यूँ ही जाम नजर से,
पिलाया करों।
चढ़ती रात में,
हम को जरा.
तुम्हारा जादू ऐसा है,
अब नहीं संभाला जाता है.
यूँ ही थाम लो,
बाहों में अपने।
बढ़ के तुम,
हम को जरा.
कल तक थी शिकायत,
क़द्र नहीं हमें आपके जज्बातों का.
अब है शिकवा की,
कुछ ज्यादा ही ख़याल आ रहा है आपका।
यूँ ही हर मोड़ पे,
शिकायत करों।
मगर हंसकर,
तुम हमसे जरा.

परमीत सिंह धुरंधर


साँसों को मेरे सनम कुछ ऐसा एहसास है,
बिखर कर भी टूट के, पास तेरे होने का ख़्वाब है.

परमीत सिंह धुरंधर

ख़्वाब


इसी धरती पे हमने देखा अंग्रेजों को जाते,
इसी धरती पे हमने देखा सिकंदर को हारते।
इसी धरती पे हमने देखा ख़्वाबों को टूटते,
इसी धरती पे देख रहे हैं हम ख़्वाबों को लूटते।
हर दाल पे बैठा है एक मदारी,
दिखता है ख़्वाब जो रंगीन जीवन के.
मगर कोई कह दे कैसे हम डालें,
रंग उनमे हकीकत के.
हर मंदिर में जाके हमने माथा अपना टेका,
हर मस्जिद में जाके दुआ की अपने रब से,
फिर भी हार जाते हैं, हम मंजिल पे आके.

परमीत सिंह धुरंधर

संगम


संगम हुई तो समझे सरस्वती का दर्द,
वो मेरी न हो सकी जब हम थे एक संग.
भूल तो सबसे हुई पर हम भूल न सके,
एक भूल की इतनी बड़ी कीमत.

परमीत सिंह धुरंधर

Chaval and Curry


Let us marry,

Let us marry.

You will cook chaval,

And I will make curry.

Whether salt or sugar,

We will eat together,

And have a baby.

Let us marry,

Let us marry.

You will cook chaval,

And I will make curry.

Parmit Singh Dhurandhar

बिखरना है जिंदगी


बिखरना है जिंदगी इस कदर जमाने में,
की जर्रे – जर्रे में खुशबु रहे.

परमीत सिंह धुरंधर

किस्मत


आँखों की किस्मत के क्या कहने,
धुप में भी छावं लगे.
दुप्पट्टा जब सर से ढलक के,
उनके सीने पे ठहरे।
कौन कम्बखत,
जन्नत की सैर चाहता है.
बस हवा का झोंका, एक पल को,
उनका दुप्पट्टा उड़ा दे.

परमीत सिंह धुरंधर