लोहिया एक आंदोलन थे,
जीवन और संघर्ष,
का सम्मलेन थे.
मुस्कराते हुए भी,
कंटीले पथों पे चलकर,
जुल्म के खिलाफ,
खड़ी हुई भीड़ का आभूषण थे.
लोहिया एक आंदोलन थे.
जब भाग रहे थे सभी अंधे हो कर,
गांधी और नेहरू की तरफ.
तब हम जैसे सत्य के सिपाहियों,
के लिए वो एक भगवान थे.
लोहिया एक आंदोलन थे,
अपने आप में सम्पूर्ण जन-आंदोलन थे.
लोहिया एक आंदोलन थे.
परमीत सिंह धुरंधर