Beauty is just a variable


Perl is beautiful when the task is difficult, but Perl is ugly for the easy task. Thus beauty is just a variable.

Parmit Singh Dhurandhar

Success of marriage


What I realized after so many years of marriage is that the success of marriage depends on the number of kiss. Whenever I say sorry after any argument, she starts kissing silently. After every her mistake, I get a bonus if I move on with a smile.

These are sweeter than the bed kiss.

Parmit Singh Dhurandhar

Evolution and Marriage


Unmarried girls are more identical then married girls. Thus the variability is higher among unmarried girls. The degree of variability increase with number of years in married life but not with the number of marriage.  That’s why a society with girls preferring unmarried life may not evolve and may become extinct after some time.

Parmit Singh Dhurandhar

Relation between beauty and success


The evolution of beauty is driven by men. And, the success of men is driven by women.

Parmit Singh Dhurandhar

Being dirty is the symbol of the success


The terminal looks beautiful when it is dirty. That is the moment we start caring and giving attention to it.

Parmit Singh Dhurandhar

हुस्न चारदीवारी में नहीं बंधती


हर खूबसूरत गली,
मंजिल नहीं होती।
कुछ राहें,
सदा अँधेरे में होती हैं,
पर उनपे,
जिंदगियां बर्बाद नहीं होती।
आंसू बहाने से,
आँखे ह्रदय के करीब नहीं होती।
हुस्न वाले मोहब्बत में,
किसी एक की नसीब में नहीं होती।
दस – घाटों से गुजरने के बाद,
नदिया प्यासी होती है सागर के लिए.
भरी जवानी में हुस्न,
चारदीवारी में नहीं बंधती।

परमीत सिंह धुरंधर

मधुरम्-मधुरम् माधुरी


मधुरम्-मधुरम् माधुरी, करे मेरे दिल की चाकरी।
श्री देवी अति सुंदरी, सुंदरम-सुंदरम माधवी।
करिश्मा से रवीना, जबकि नजर का कमीना,
सब के संग बिताऊंगा बस एक-एक ही महीना।
चाहे सेक्सी साईरन हो या थंडर थाई,
सबके लिए बचाई है अपनी ये कमाई।
रेखा हो या जयाप्रदा, शांतिप्रिय या भानुप्रिया,
सब खाना चाहती है बस मेरे ही दुकान की मलाई।

परमीत सिंह धुरंधर

राममनोहर लोहिया: हमारा भी हक़ है


हम वीरों की धरती के,
वाशिंदे हैं.
हम कारिंदे नहीं,
जो यूँ पगार लें.
इस धरती पे,
हमारा भी हक़ है.
हम कोई पंक्षी नहीं,
जो यूँ आहार लें.
तुम्हे अगर नहीं है स्वीकार,
हमारी समानता,
तो ये तुम्हारी मज़बूरी है.
हम कोई फ़कीर नहीं,
जो अपने पेट पे प्रहार लें.

परमीत सिंह धुरंधर

राममनोहर लोहिया: मैं टकराता चलूँगा


यूँ ही जुल्म को मिटाता चलूँगा,
ए सत्ताधीशों,
सुन लो, मैं टकराता चलूँगा।
तुम सत्ता के जिस सिहासन पे बैठो हो,
मैं उसकी जड़ों को हिलाता चलूँगा।
ए सत्ताधीशों,
सुन लो, मैं टकराता चलूँगा।
तुम्हारे वादे झूठे, दिखावे और फरेब हैं,
मैं जन-जन को ये बताता चलूँगा।
ए सत्ताधीशों,
सुन लो, मैं टकराता चलूँगा।
तुम्हे अगर भूख है गरीबों के लहूँ की,
तो मैं तुम्हारी बागों को उजाड़ता चलूँगा।
ए सत्ताधीशों,
सुन लो, मैं टकराता चलूँगा।
तुम्हे गुरुर है जिन गुलाबों के प्रेम पे,
जब तक सांस हैं तन में,
मैं इन गुलाबों को सुखाता चलूँगा।
ए सत्ताधीशों,
सुन लो, मैं टकराता चलूँगा।

परमीत सिंह धुरंधर

लोहिया एक आंदोलन थे


लोहिया एक आंदोलन थे,
जीवन और संघर्ष,
का सम्मलेन थे.
मुस्कराते हुए भी,
कंटीले पथों पे चलकर,
जुल्म के खिलाफ,
खड़ी हुई भीड़ का आभूषण थे.
लोहिया एक आंदोलन थे.
जब भाग रहे थे सभी अंधे हो कर,
गांधी और नेहरू की तरफ.
तब हम जैसे सत्य के सिपाहियों,
के लिए वो एक भगवान थे.
लोहिया एक आंदोलन थे,
अपने आप में सम्पूर्ण जन-आंदोलन थे.
लोहिया एक आंदोलन थे.

परमीत सिंह धुरंधर