अलका लम्बा की जवानी शीला दीक्षित जी रही हैं


गलत पति चुनने से लड़की का जीवन बर्बाद हो जाता है, कैसे ?
बोलो दोस्तों। बोलो दोस्तों।
क्यों की उसकी जवानी, उसकी सौतन ले लेती है.
आज अलका लम्बा की जवानी शीला दीक्षित ने ले ली.
क्यों की उसकी नींदे उसकी सौतन सोती है.
आज से अलका लाम्बा की रातों की नींद, शीला दीक्षित जी सोयेंगी।

परमीत सिंह धुरंधर

कमरिया करे लपालप, की लॉलीपॉप लागेलू


कमरिया करे लपालप, की लॉलीपॉप लागेलू।
कमरिया करे लपालप, की लॉलीपॉप लागेलू।
अइसन बा ताहर नजरिया, की चकाचक लागेलू।
कजरा पे तहरा बहकल सारा छपरा,
आ लहंगा से तहरा लहकता देवरिया।
जब करेलू टाइट चोली, मीठा ख़्वाब लागेलू।
कमरिया करे लपालप, की लॉलीपॉप लागेलू।
हिरणी सी चलके, मोह लेलु मोहनिया,
देख गदराइल जवानी, जाम भइल मलमलिया।
जब उड़ावेलु ओढ़नी, जिला टॉप लागेलू।
कमरिया करे लपालप, की लॉलीपॉप लागेलू।

परमीत सिंह धुरंधर

I wrote this after listening this video

The hot smoking girl


The hot smoking girl,

Black and tall.

With denim jeans,

And with a Gold Flake,

She held my hand.

We walked together,

At Rajiv Chowk .

Parmit Singh Dhurandhar

मजा : मौत तक प्रयास में है


नशा जीत में नहीं,
जंग में है.
सागर की लहरो में नहीं,
मजधार में है.
लड़ना है जिंदगी में,
चारो तरफ से फंस के.
तैरना है सागर को,
मजधार में डूब के.
जोश सागर के पार जाने या,
पहाड़ की छोटी पे चढ़ने में नहीं,
मौत तक प्रयास में है.
मजा लहूँ के बहने में नहीं,
उसके रिसने में है.
नशा तलवार की धार में नहीं,
उसके टकराव में है,
उसकी आवाज में है.

परमीत सिंह धुरंधर

केजरीवाल की सहायता से लालू राज लाएंगे


लालू राज लाएंगे, लालू राज लाएंगे,
केजरीवाल की सहायता से, लालू राज लाएंगे।
खोखला अहंकार को स्वाभिमान बता रहें,
ये केजरीवाल जी हैं, भैंस को गाय बता रहें।
फिर मिल बैठ के संग सब चारा खाएंगे।
केजरीवाल की सहायता से, लालू राज लाएंगे।
चाहे राबड़ी जी बैठे, या सत्ता पे नितीश जी,
जनता की तिजोरी में चूना फिर लगाएंगे।
केजरीवाल की सहायता से, लालू राज लाएंगे।

परमीत सिंह धुरंधर

पत्नी


गले – से – गले मिलके,
तुमने संभाला है ओठों को.
वरना हम तो बहक ही चुके थे,
देख, शहर में मयखाने को.
मिलती है अनगिनित परियाँ,
रोज, मेरी रात बसाने को.
तुम ना होते तो बिक ही जाते,
आँचल उनका सजाने को.
कई साल बीते, यूँ ही,
एक ही साड़ी पहने- पहनते.
और हर मास, मुझे नया,
सूट तुम सिलवाती हो.
ये तुम ही हो जिसने बचाईं है,
दीवारें मेरे घर की.
पर दुनिया भर में कहती हो,
नाम मेरा, अहम मेरा बचाने को.
बाहों – में – बाहें डालकर,
तुमने ही बचाया है जीवन को.
वरना हम तो मिट चुके थे,
कब का, खाते – खाते राहों में ठोकरों को.

परमीत सिंह धुरंधर