Is there any way?


Is there any way?
To win your heart again,
Just let me know,
Just let me know.
Even the moon needs so many stars,
To make a beautiful night,
My life has no meaning,
Without your smile.
Is there any way?
To make it again,
Just let me know,
Just let me know.

Parmit Singh Dhurandhar

कड़वा सच


लडकियां बस अपने आशिकों की मौत चाहती हैं,
उनके आंसू, उनके दुःख और उनकी लावारिस लाश चाहती हैं.
शान से कहती हैं की उनको सती – सावित्री ना समझें,
मगर सती – सावित्री होने का फिर भी ढोंग करती हैं.
शादी के मन्त्रों पे हंसने वाली हर लड़की,
तीस के बाद शादी के महत्त्व की बात करती है.
और वो लौटा रहीं हैं एक – एक करके अपने पुरस्कारों को,
जिस दहसतगर्दी के खिलाफ एक जुट हो कर,
उन्ही दहसतगर्दीयों को, अपनी जवानी में,
अपने आँचल में शयन-सुख प्रदान करती हैं.
लडकियां बस अपने आशिकों की मौत चाहती हैं,
उनके आंसू, उनके दुःख और उनकी लावारिस लाश चाहती हैं.

परमीत सिंह धुरंधर

पिता के प्यार का प्याला


हर पुत्र को पिता के प्यार का प्याला मिलना चाहिए,
ए खुदा,
जब तक पुत्र की प्यास न मिट जाए,
पिता – पुत्र का साथ बना रहना चाहिए।
सर्प – दंस से भी ज्यादा जहरीला है,
पिता से पुत्र का विछोह।
ए खुदा,
इस जहर का भी कोई तो काट होना चाहिए।

परमीत सिंह धुरंधर

किसान


किसान सिर्फ बैलों के आगे सर झुकातें हैं, उनको पूजते हैं, सांड के आगे नहीं।
जो हाथ हल उठाना जानते हैं, वो हाथ समय आने पे सांड को भाला मारना भी जानते हैं.

Meaning: Dont underestimate the power of farmers.

This is dedicated to our second PM Shri Lal Bahadur Shashtri jee for his support to Indian farmers.

परमीत सिंह धुरंधर

कलम भी मौन रह गए


किसानों की ऐसी – की – तैसी करके,
गांधी की पार्टी चल रही है मुस्करा के.
झंडा उठा दिया है सत्ता के खिलाफ,
बस बीफ के मुद्दे को मुद्दा बना के.
दलितों के कपड़े फाड़ कर उनको,
नंगा कर दिया पुलिश वालो ने.
मोदी के मौन के खिलाफ,
साहित्य अकादमी आवार्ड लौटाने वाले,
कलम भी मौन रह गए,
हरिजनों के इस दमन पे.

परमीत सिंह धुरंधर

भीड़


गधा अगर गधों की भीड़ में हो तो वो गधा नहीं होता,
लेकिन अगर घोड़ा गधों की भीड़ में हो तो पीढ़ियां बर्बाद हो जाती हैं.

परमीत सिंह धुरंधर

छावं


जिन बाहों के लिए वो छोड़ गयीं,
मेरे घर के दरवाजों को.
उसी टूटे – फूटे दरवाजों की छावं में,
अपनी मसरूफियत से दूर सुस्ता लेती हैं.

परमीत सिंह धुरंधर

मोहब्बत


कसम क्या दे उन्हें अब मोहब्बत का,
वो दिन थे जब हम जला करते थे.
अब ये राते हैं,
जब वो जला करती हैं.

परमीत सिंह धुरंधर

हालात बदल रहें हैं


वो हाल पूछती है हमसे मौसम का,
जबकि उनके शौहर मौसम विभाग में हैं.
हालात इस कदर बदल रहें हैं,
की उनके बच्चे भी अब हमारी सोहबत में हैं.

परमीत सिंह धुरंधर

पगुराने का मज़ा


जो मज़ा खाने में नहीं वो पगुराने में है.

परमीत सिंह धुरंधर