बागों का शौक


जो बागों का शौक रखते हैं उन्हें आम के मौसम का इंतज़ार नहीं रहता.

परमीत सिंह धुरंधर

घोड़ा


घोड़ा एक बार टमटम में जुत जाए, तो फिर वो शादी में कभी नहीं दौड़ता चाहे जितना जोर लगा लो.

परमीत सिंह धुरंधर

Lets try once again


Lets try once again,
Even if there is no chance,
Lets try once again.
Failure does not mean,
this is the last stage,
Lets try once again,
Lets try once again.
I still remember those nights,
When we were together,
I still have the same need,
And you still have the same fire.
Lets try once again,
Even if there is no chance,
Lets try once again.

Parmit Singh Dhurandhar

गमें – रात का इंतज़ाम


गमें – रात का हम कुछ यूँ इंतज़ाम करते हैं,
यारों की टोली, हुस्न वालों के किस्से,
कबाब और हाथों में जाम रखते हैं.
गम क्या करें जिंदगी की कोई साथ नहीं है,
हम तो हर रात तुझे जीने का नया ख़्वाब रखते हैं.

परमीत सिंह धुरंधर

I am burning in my own desire


In your arms I want to melt.
But my ego makes it harder
The more close I want to come
The more I go further.

You are my moon, which never merges with me
Because of my own gravity
But its true, I am only for you
Till eternity

I am burning in my own desire
As if you always were the source of fire
This is my destiny
My Love is my tragedy

By one of my close friend

Samarendra Singh

दंश


ना मोक्ष चाहता हूँ, ना भोग चाहता हूँ,
ना सुख कोई, ना सवर्ग,
ना फिर मानव जीवन चाहता हूँ.
ना अब छीनो पुत्रों से उनके पिता,
ना मिले फिर किसी को,
ए विधाता,
मैं जो ये दंश झेलता हूँ.

परमीत सिंह धुरंधर

पिता


पिता तुम प्राणों से प्यारे हो,
हर जन्म में तुमसे ही साँसे मिलें।
तन तो तुम से विछुड़ गया,
मगर मन को तुम्हारा धाम मिलें।
पखार तो नहीं सका तुम्हारे चरणों को,
अब आसुंओं की धारा है.
तुमसे विछुड़ कर अब इन आँखों को भी,
बस पीड़ा – ही – पीड़ा है.

परमीत सिंह धुरंधर

ये चुनाव और वोट भी आपका अपना दोस्तों


ये लड़ाई है हमारे अधिकारों की,
हमारे मांगों की, हमारे अरमानों की,
पांच साल में आता है ये मौका दोस्तों,
देखो फिर ये मौका न इसे गवाना दोस्तों।
साक्षर तो हैं अब सभी,
पर सबको सजग बनना है.
सीमा के प्रहरी सा अब,
सबको अटल बनना है.
जात – पात और धर्म में बांधकर,
फिर न पीछे पछताना दोस्तों।
देखो फिर ये मौका न इसे गवाना दोस्तों।
अब जब बिटिया निकले और बहने सड़क पे,
तो उनका आँचल लहराए।
ना उनके ह्रदय में भय हो,
ना उनकी आँखे झुकीं हों,
ऐसा शासक – सुशासक है लाना दोस्तों,
की किसी ऐसे को ना बिठा दो इस ताज पे,
फिर बहनों को पड़े घूँघट करना दोस्तों।
पांच साल में आता है ये मौका दोस्तों,
देखो फिर ये मौका न इसे गवाना दोस्तों।
मेरा काम है आपको समझाना दोस्तों,
ये धरती आपकी, ये गावं आपका,
ये चुनाव और वोट भी आपका अपना दोस्तों।
तो सोच लो, समझ लो,
विचार कर लो,
किस – किस को हैं चुनना,
और किस को है हराना दोस्तों।
पांच साल में आता है ये मौका दोस्तों,
देखो फिर ये मौका न इसे गवाना दोस्तों।

This is to explain the important of  election. People should give importance to this as they give for their religion.

परमीत सिंह धुरंधर

गुलाब


ना वफ़ा की चाहत है, ना बेवफाओं के जिस्म की,
हमने सारे अपने किस्मत के गुलाबों को, गंगा में बहा दिया।

My life is not dependent on the quality of life. It is for the principles of life.

परमीत सिंह धुरंधर

जिंदगी


नसीबों का खेल है जिंदगी,
हमने उसे वसूलों में बाँध के रख दिया,
तुम जिस मुकाम पे पहुँच के इतरा रहे हो,
हमने कब का उससे ठोकरों में तौल के रख दिया।

My life is not dependent on the chance of success, it depends how much resistance I will get in the path.

परमीत सिंह धुरंधर