मैं मलखान बन गया


की तू जब से हुई जवान,
मैं मलखान बन गया.
ज्यों -ज्यों ढलका आँचल,
मैं मस्तान बन गया.
चोली – चुनर, सब एक – एक,
करके बिछड़ने लगे.
बदलते आँखों के तेरे रंग पे,
मैं सुलतान बन गया.
काली राते भी चमक उठीं,
अंगों के तेरे चमक पे.
सीने से तेरे लग के,
मैं आज धनवान बन गया.

 

परमीत सिंह धुरंधर

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