कुत्तों – कमीनों की भीड़ कैसी?
Khattri, Crassa, आफताब जैसी।
किसी की लगा दें,
किसी की सुलगा से.
पल भर में ही,
किसी की भी दुनिया हिला दें.
इनके आगे तो सबकी है फट्टी पड़ी.
कुत्तों – कमीनों की भीड़ कैसी?
Khattri, Crassa, आफताब जैसी।
कितनो का मान धोया,
कितनो का इंद्रा रोया।
कितने चौबों को,
दुबे बना के छोड़ दिया।
किसी की शान्ति, किसी की भ्रान्ति,
इनके आगे तो है मिटी सबकी।
कुत्तों – कमीनों की भीड़ कैसी?
Khattri, Crassa, आफताब जैसी।
परमीत सिंह धुरंधर