आरजु – ए- वतन


धरती पे, आसमां पे,
आरजु – ए- वतन रखता हूँ.
चाहे जहाँ भी रहूँ,
भोजपुरी को अपनी माँ कहता हूँ.

 

परमीत सिंह धुरंधर

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