यादों का समंदर है पिता


तेरे यादों का समंदर है पिता मेरे दिल में,
क्या किसी से मोहब्बत चाहूँ जब सागर ही है मुझमे।
भटकती मेरी राहों को कैसे तुमने संभाला होगा,
अब जाके समझा जब कितनो को रुलाया है मैंने।

 

परमीत सिंह धुरंधर

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