रावण-मेघनाथ


शेर बनाया हैं मैंने, कोई भीड़ के तो देखे।
ये लाल हैं मेरा, कोई इससे लड़ के तो देखे।
रण में रावण का आना तो बहुत दूर,
कोई मेघनाथ से पहले दो दावँ खेल के तो देखे।
इंद्रा को हरा के जो लौटा था मेरे पास,
प्रिये सुलोचना के लिए, जिसने दिया शेषनाग को पछाड़।
वो लहू है मेरा, कोई ललकार के तो देखे।
शेर बनाया हैं मैंने, कोई भीड़ के तो देखे।
ये लाल हैं मेरा, कोई इससे लड़ के तो देखे।

 

परमीत सिंह धुरंधर

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